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तीन तलाक का राजनीतिकरण

                    तीन   तलाक का राजनीतिकरण तीन तलाक का मुद्दा भारत में संसद से लेकर सड़क तक इस समय जोरों पर है. भारतीय जनता पार्टी तीन तलाक को सख्त कानून के रूप में देखना चाहती है. विशेषज्ञों का मानना है कि तीन तलाक भारत में नहीं बल्कि विश्व में जेंडर जस्टिस के खिलाफ है. महिलाओं को भी पुरुषों के समान वह सारे संवैधानिक अधिकार होना चाहिए जो पुरुषों को प्राप्त है. भारत एक पुरुष प्रधान देश है जिसमें प्रत्येक भर के द्वारा स्त्री को पितृसत्ता की अधीनता स्वीकार करनी होती है. सामान्य रूप से भारतीय संविधान में सभी पुरुष और स्त्री को समानता का अधिकार प्राप्त है ले ,धर्म की आड़ में चाहे हिंदू महिलाएं हो मुस्लिम महिलाएं हो किसी न किसी रूप में स्त्री को उसके इस अधिकारों से वंचित रखा जाता है. आज भारत में तीन तलाक का मुद्दा जोरों पर है विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ तीन बार तलाक तलाक तलाक कहना और स्त्री से संबंध विच्छेद होना पड़ता है गलत है. तीन तलाक जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर इस्लाम और शरियत में एक निश्चित मानदंड को अपनाया गया है. भारती जनत...

शिक्षक और कर्मचारियों ने की पुरानी पेंशन बहाली की मांग

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              कर्मचारी शिक्षक अधिकारी पुरानी बहाली मंच                     जनवाद टाइम्स  20 जनवरी को कर्मचारी शिक्षक पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले लखनऊ में एक आवश्यक बैठक बुलाई गई . बैठक का एकमात्र उद्देश्य पुरानी पेंशन बहाली था. बैठक में उपस्थित सभी शिक्षक एवं कर्मचारी गण ने अपनी पूरी सामर्थ के साथ पुरानी पेंशन बहाली में अपना योगदान देने की बात की. इस बैठक में    फुपुक्टा अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान, औटा महामंत्री डॉक्टर निशांत चौहान औटा कार्यकारिणी सदस्य डॉक्टर दिग्विजय पाल सिंह उपस्थित होकर पूरी ऊर्जा के साथ कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली की मांग की है. डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान जी ने बताया कि 21 फरवरी को पुनः आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने बताया कि कल प्रत्येक जिले के मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा. उन्होंने सभी सम्मानित शिक्षक गणों तथा कर्मचारियों से अपनी सहभागिता प्रदान करने के लिए अपील की तथा आंदोलन को सही दिशा देने के लिए उपस्थिति सुनिश्चित कर...

कोलकाता में जयंत चौधरी का जबरदस्त भाषण

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कोलकाता में देश के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा : जयंत चौधरी ने दिया जबरदस्त भाषण

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जनवाद टाइम्स : janvadtimes.blogspot.com पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश के सभी दलों के शीर्ष नेताओं की मीटिंग कोलकाता में शनिवार को बुलाई. उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और आरएलडी के जयंत चौधरी ने हिस्सा लिया. सभी ने वर्तमान सरकार की नीतियों का विरोध किया.जयंत चौधरी ने अपने भाषण में कहा कि वर्तमान सरकार किसान विरोधी सरकार है.पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के द्वारा चलाई गई किसानों के हित में फसल बीमा योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना चाहिए. ममता बनर्जी जी ने मां माटी और मानुष का नारा देकर राज्य को बहुत ऊंचा उठा दिया. जयंत चौधरी ने कहा कि अगर देश में अच्छे दिन लाना है तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार को उखाड़ फेंकना होगा. इसके लिए सभी राज्यों के दलों को एकजुट होकर 2019 के चुनाव के लिए रणनीति बनानी होगी. उत्तर प्रदेश में गठबंधन की ओर संकेत कर जयंत चौधरी ने कहा कि हम इस दिशा में कार्य करने के लिए तैयार हो चुके हैं हमने पूर्व चुनाव में बीजेपी की 73 सीटों को घटाकर 70 पर कर दिया है. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार निजी करण और बाजारीकरण को...

यूपी में बसपा और सपा गठबंधन का ऐलान

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जनवाद टाइम्स : महेंद्र कुमार निगम 12 जनवरी को लखनऊ के ताज होटल में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के द्वारा संयुक्त रूप से बसपा और सपा गठबंधन का ऐलान किया गया. इस प्रेस वार्ता में सर्वप्रथम सुश्री मायावती ने बसपा को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के आदर्शो पर चलने वाली पार्टी बताएं. बसपा और सपा का प्रथम गठबंधन 1993 मान्यवर कांशी राम और माननीय मुलायम सिंह के नेतृत्व में किया गया था. सुश्री मायावती जी ने भारतीय जनता पार्टी को सांप्रदायिक पार्टी बताया. मायावती जी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को गुरु और चेले बता कर उन पर तीखा प्रहार किया. मायावती ने यह भी बताया कि बहुजन समाजवादी पार्टी 2 जून 1995 गेस्ट हाउस को भुला कर देश हित व जनहित को ध्यान में रखते हुए यह गठबंधन करने का फैसला लिया है. उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी लोहिया जी के आदर्शो पर चलने वाली पार्टी है. उन्होंने यह भी बताया कि बसपा और सपा का गठबंधन सर्व समाज का गठबंधन है जो 2019 के लिए राजनीतिक क्रांति का संदेश है. इस राजनीतिक संदेश से देश और समाज की उम्मीद...

प्रशासन द्वारा जन जागरूकता कार्यक्रम

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सावित्रीबाई फुले : भारत की पहली महिला शिक्षिका

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 सावित्रीबाई फुले : भारत की पहली महिला शिक्षिका                 जनवाद टाइम्स : डॉ महेंद्र कुमार निगम            भारत की महान समाज सुधारक , प्रथम महिला शिक्षिका   कवयित्री सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को नाएगांव तहसील खंडाला जिला सातारा महाराष्ट्र में हुआ. उनके पिताजी का नाम  खंडोजी नावसे पाटिल तथा माता का नाम    नाम लक्ष्मी बाई था . उनका विवाह  ज्योतिबाराव फूले जी के साथ 1840  में  9 वर्ष की उम्र में हुआ. ज्योतिबा फूले की प्रेरणा से 1845 स्कूली शिक्षा प्राप्त की. महात्मा  ज्योतिबा राव फुले ने  1 जनवरी 1848 मेंं लड़कियों केए प्रथम पाठशाला की शुरुआत की. इस पाठशाला में पहली महिला शिक्षिका वह मुख्य अध्यापिका सावित्रीबााई फुले नियुक्ति  हुई. सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका के साथ अपने जीवन में एक सफल समाज सेविका और  कवयित्री के रूप में ख्याति प्राप्त की. सावित्रीबाई फुले का कविता संग्रह'काव्य फुले '1854 मैं प्रकाशित हुई ,...